भक्तामर स्तोत्र भाषा (हेमचन्द) आदिपुरुष आदीश जिन, आदि सुविधि करतार। धरम-धुरंधर परमगुरु, नमों आदि अवतार॥ सुरनतमुकुट रतन छवि करैं, अंतर पापतिमिर सब हरैं। जिनपद वंदों मन वच काय,भवजलपतित उरधरनसहाय॥ 1॥ श्रुत पारग इंद्रादिक देव, जाकी थुति कीनी कर सेव। शब्द मनोहर अरथ विशाल, तिस प्रभु की वरनों...
भक्तामर-स्तोत्र (संस्कृत) || BHAKTAMAR STOTRA (SANSKRIT)
भक्तामर - प्रणत - मौलि - मणि -प्रभाणा- मुद्योतकं दलित - पाप - तमो - वितानम्। सम्यक् -प्रणम्य जिन - पाद - युगं युगादा- वालम्बनं भव - जले पततां जनानाम्।। 1॥ य: संस्तुत: सकल - वाङ् मय - तत्त्व-बोधा- दुद्भूत-बुद्धि - पटुभि: सुर - लोक - नाथै:। स्तोत्रैर्जगत्- त्रितय -...